फरीदाबाद। यमुना का जलस्तर अब पूरी तरह से अपने स्थान पर लौट चुका है। इस समय नदी में मात्र 47,490 क्यूसेक पानी रह गया है। लेकिन बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों में जीवन को पटरी पर लाना अब भी बेहद मुश्किल बना हुआ है। किसानों की हजारों एकड़ भूमि पर खड़ी फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है, जिसका आकलन प्रशासन कर रहा है।

गांव बसंतपुर में लोग धीरे-धीरे अपने घरों में लौट रहे हैं। लेकिन 200 से अधिक मकानों के बाहर अब भी पानी जमा है। कई घरों के बाहर ताले लटके हुए हैं। मकानों के अंदर घुसा बाढ़ का पानी सुखने के बाद मिट्टी और गाद की मोटी परत छोड़ गया है। लोग अपने घरों में लौटकर बदहाल हालात देखकर परेशान हैं।

खेती पूरी तरह से चौपट
राजपुरा, चांदपुर, चिरसी, इस्माइलपुर सहित दर्जनों गांवों में धान, बाजरा, स्वीट कार्न और अन्य सब्जियों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। खेतों में कई फीट मोटी रेत की परत जम गई है। किसान अनिल (राजपुरा निवासी) ने बताया कि इस स्थिति में अगली फसल बोने की तैयारी करने में कम से कम छह महीने का समय लग जाएगा। इससे किसानों का नुकसान इस बार पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।

प्रशासन जुटा राहत कार्यों में
डीसी विक्रम सिंह ने बताया कि प्रशासन लगातार प्रभावित इलाकों में राहत कार्य चला रहा है। जहां दवाइयों की जरूरत है, वहां तुरंत दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। फसलों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है। यमुना अब शांत है, लेकिन जिन जगहों पर आवाजाही संभव नहीं है, वहां प्रभावित लोग अभी भी शेल्टर होम में रह रहे हैं। प्रशासन उनकी हर संभव मदद कर रहा है।
